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शपथ-पत्र कैसे बनाएं 2026: फॉर्मेट, स्टांप खर्च, नोटरी प्रक्रिया और 7 गलतियां जिनसे बचना है

📅 1 October 2026 • ⏱️ 10 मिनट में पढ़ें • ✍️ Rohit Suhan

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कानूनी कागज़ • कानूनी जानकारी

सबसे पहले तीन गलतफहमियां तोड़ते हैं — क्योंकि शपथ-पत्र को लेकर गली-मोहल्ले में जितना सुना जाता है, उसमें से आधा गलत है। पहली: “शपथ-पत्र तो सादे कागज़ पर लिखकर भी बन जाता है।” दूसरी: “इंटरनेट से फॉर्मेट उतारकर प्रिंट निकाल लिया, काफी है।” और तीसरी: “जिस काम के लिए चाहिए, उसी के नाम का शपथ-पत्र हर जगह एक जैसा होता है।”

तीनों बातें अधूरी हैं — और अधूरी जानकारी शपथ-पत्र जैसे गंभीर कागज़ पर भारी पड़ सकती है। शपथ-पत्र शपथ लेकर दिया गया लिखित बयान होता है, जिसकी हर बात अदालत और सरकारी कार्यालय में सच मानी जाती है। इसलिए इसका फॉर्मेट, इसका स्टांप, और इसे प्रमाणित करने वाला व्यक्ति — तीनों के अपने नियम हैं। आज इन्हीं नियमों को खोलकर रखते हैं: शपथ-पत्र आखिर है क्या, कहां-कहां मांगा जाता है, बनवाने में कितना खर्च आता है, और वो 7 गलतियां कौन-सी हैं जो शपथ-पत्र को रद्द भी करा सकती हैं।

शपथ-पत्र आखिर होता क्या है — एक सीधी परिभाषा

शपथ-पत्र यानी शपथ या सत्यनिष्ठा के साथ दिया गया लिखित बयान, जिसे शपथ दिलाने का अधिकार रखने वाले व्यक्ति (नोटरी, शपथ आयुक्त, मजिस्ट्रेट आदि) के सामने दिया जाता है। सीधे शब्दों में — आप किसी बात की लिखित में घोषणा करते हैं, उसके नीचे हस्ताक्षर करते हैं, और एक अधिकृत व्यक्ति इस बात की पुष्टि करता है कि ये बयान उसके सामने ही दिया गया है।

⚖️ कानूनी वज़न समझिए: शपथ-पत्र सिर्फ एक कागज़ नहीं है — ये सबूत की श्रेणी में आता है। शपथ अधिनियम, 1969 के तहत ये माना जाता है कि शपथ-पत्र में लिखा हर बयान सच है। अदालतों में शपथ-पत्र नागरिक प्रक्रिया संहिता के आदेश 19 (Order XIX) के नियमों से नियंत्रित होते हैं — इस आदेश का नियम 3 साफ कहता है कि शपथ-पत्र में वही बातें लिखी जाएं जो बयान देने वाले की अपनी जानकारी में हों, और जो बातें सुनी-सुनाई हों, उनके स्रोत का भी ज़िक्र हो।

यही वजह है कि सरकारी दफ्तरों — आधार केंद्र, पासपोर्ट कार्यालय, बैंक, तहसील — में जब कोई दस्तावेज़ न हो, तो शपथ-पत्र मांगा जाता है। आपकी शपथ ही उस वक्त दस्तावेज़ का काम करती है।

5 सबसे बड़ी गलतफहमियां — भ्रम बनाम हकीकत

लोग शपथ-पत्र को लेकर गूगल पर जो सवाल सबसे ज़्यादा पूछते हैं, उनके जवाब एक जगह रख देते हैं:

❌ भ्रम (लोग क्या समझते हैं)✅ हकीकत (नियम क्या कहता है)
“सादे कागज़ पर लिखकर नीचे हस्ताक्षर कर दिया — शपथ-पत्र तैयार”नहीं। शपथ-पत्र बिना सत्यापन के अधूरा है। जब तक अधिकृत व्यक्ति (नोटरी/शपथ आयुक्त/मजिस्ट्रेट) के सामने शपथ लेकर प्रमाणित न हो, वो कागज़ सिर्फ एक लिखित बयान है — शपथ-पत्र नहीं।
“इंटरनेट से फॉर्मेट उतारकर नाम बदलकर प्रिंट कर लिया, काफी है”फॉर्मेट सिर्फ ढांचा है। उस पर आपके अपने तथ्य, सही स्टांप, और सत्यापन की मुहर होनी चाहिए। गलत या अधूरा भरा हुआ प्रिंट कार्यालय में खारिज हो जाता है।
“एक बार बनवा लिया, तो हर जगह चलेगा”हर शपथ-पत्र किसी खास काम और खास कार्यालय के लिए बनता है — उसमें उद्देश्य और संबंधित कार्यालय का नाम लिखा होता है। नाम बदलने का शपथ-पत्र आय प्रमाण के काम नहीं आएगा।
“गांव के सरपंच या पार्षद से सत्यापित करवा लिया, काफी है”नहीं। शपथ दिलाने का अधिकार सिर्फ तय लोगों को है — नोटरी, शपथ आयुक्त, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट, कार्यपालक मजिस्ट्रेट, ज़िला मजिस्ट्रेट आदि। सरपंच/पार्षद का हस्ताक्षर शपथ-पत्र का सत्यापन नहीं है।
“शपथ-पत्र में थोड़ी-बहुत गलत जानकारी चल जाती है”बिल्कुल नहीं। शपथ-पत्र में जानबूझकर झूठी जानकारी देना अपराध है — भारतीय न्याय संहिता में झूठे साक्ष्य/झूठे बयान के लिए कारावास और जुर्माने का प्रावधान है, और अदालत ऐसे व्यक्ति पर मुकदमा चलाने का आदेश दे सकती है।

किन-किन कामों में शपथ-पत्र मांगा जाता है

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शपथ-पत्र दो तरह के कामों में सबसे ज़्यादा मांगा जाता है। अपने काम को नीचे दिए दोनों खानों में खोजिए:

🧾 पहचान और नाम से जुड़े काम

  • नाम बदलना या नाम में सुधार (अखबार में विज्ञापन के साथ)
  • जन्मतिथि या पते में सुधार, आधार/पैन में त्रुटि
  • दो नामों के एक ही व्यक्ति होने का प्रमाण (“एक ही व्यक्ति” शपथ-पत्र)
  • पासपोर्ट के लिए पते या जन्मतिथि का शपथ-पत्र
  • खोए/फटे दस्तावेज़ की जगह घोषणा

🏛️ सरकारी योजना और कार्यालयीन काम

  • आय प्रमाण-पत्र के लिए आय की घोषणा
  • जाति प्रमाण-पत्र के लिए शपथ-पत्र
  • ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र हेतु घोषणा
  • अदालत में मुकदमे के साथ दाखिल शपथ-पत्र
  • बैंक खाता, ऋण या डुप्लीकेट दस्तावेज़ के लिए

💡 ध्यान दें: शपथ-पत्र मांगने वाला कार्यालय अक्सर अपना तय प्रारूप भी देता है — जैसे पासपोर्ट कार्यालय या बैंक का अपना फॉर्मेट। बनवाने से पहले संबंधित कार्यालय से पूछ लें कि उन्हें किस फॉर्मेट में चाहिए, वरना दोबारा बनवाना पड़ सकता है।

शपथ-पत्र को कौन-कौन प्रमाणित कर सकता है

शपथ दिलाने का अधिकार हर किसी को नहीं है। नीचे वो लोग हैं जिनके सामने दिया गया शपथ-पत्र मान्य होता है:

प्रमाणित करने वालाकहां मिलता है / कब काम आता है
नोटरी पब्लिकसबसे आम विकल्प — हर तहसील/ज़िला मुख्यालय में नोटरी कार्यालय होते हैं। रोज़मर्रा के शपथ-पत्र (नाम, पता, आय) यहीं बनते हैं।
शपथ आयुक्त (Oath Commissioner)आमतौर पर अदालत परिसर में बैठते हैं — मुकदमों और अदालती कामों के शपथ-पत्रों के लिए।
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट / कार्यपालक मजिस्ट्रेटजब कार्यालय खास तौर पर मजिस्ट्रेट के सामने का शपथ-पत्र मांगे (जैसे कुछ सरकारी भर्तियों में)।
ज़िला मजिस्ट्रेट / तहसीलदारकुछ खास घोषणाओं और शासकीय कामों में, जहां नियम में इनका नाम लिखा हो।

एक पक्का नियम याद रखिए: हस्ताक्षर हमेशा प्रमाणित करने वाले की मौजूदगी में करने होते हैं। घर से हस्ताक्षर करके ले जाया गया शपथ-पत्र नोटरी सत्यापित नहीं करता — आपको उसके सामने ही हस्ताक्षर करने पड़ते हैं। पहचान के लिए आधार कार्ड या कोई फोटोयुक्त पहचान-पत्र साथ ले जाएं।

बनवाने की पूरी प्रक्रिया — 6 चरण

तहसील या ज़िला मुख्यालय में शपथ-पत्र बनवाना कोई लंबा काम नहीं है। पूरा सिलसिला इस तरह चलता है:

1

काम और फॉर्मेट पक्का करें। पहले ये तय करें कि शपथ-पत्र किस काम के लिए चाहिए। संबंधित कार्यालय से पूछ लें कि उन्हें कोई तय फॉर्मेट चाहिए या आम फॉर्मेट चलेगा।

2

स्टांप पेपर / ई-स्टांप लें। हरियाणा में शपथ-पत्र पर स्टांप शुल्क अनुसूची के मुताबिक ₹10 है। प्रचलन में आमतौर पर ₹10–₹20 के (कुछ कामों में ₹100 तक के) स्टांप पेपर या ई-स्टांप पर शपथ-पत्र बनवाया जाता है। ई-स्टांप egrashry.nic.in पोर्टल से या अधिकृत विक्रेता से मिलता है। ध्यान रहे — अदालत में दाखिल होने वाले शपथ-पत्र इस शुल्क से छूट के दायरे में आते हैं।

3

मसौदा तैयार करवाएं। नोटरी कार्यालय के आसपास की टाइपिंग/स्टांप की दुकानें शपथ-पत्र का मसौदा तैयार कर देती हैं। अपना पूरा नाम, पिता/पति का नाम, उम्र, पूरा पता और शपथ-पत्र का उद्देश्य साफ-साफ बताएं। हर बात अलग-अलग क्रमांकित बिंदुओं में लिखवाएं।

4

अंत में सत्यापन खंड ज़रूर हो। शपथ-पत्र के अंत में “सत्यापन” वाला हिस्सा होता है — जिसमें लिखा होता है कि ऊपर लिखी बातें आपकी जानकारी में सच हैं और कुछ भी छिपाया नहीं गया। इसके नीचे स्थान और तारीख लिखी जाती है।

5

नोटरी के सामने हस्ताक्षर करें। पहचान-पत्र के साथ नोटरी के पास जाएं। वो आपकी पहचान देखेगा, शपथ दिलाएगा, और आप उसके सामने ही हस्ताक्षर करेंगे — पहले से किए हस्ताक्षर मान्य नहीं होते।

6

मुहर और पंजीकरण संख्या जांचें। नोटरी शपथ-पत्र पर अपनी मुहर, हस्ताक्षर, नाम और पंजीकरण संख्या लगाएगा। ये चारों चीज़ें मौजूद हों, तभी शपथ-पत्र पूरा माना जाता है। एक फोटोप्रति अपने पास ज़रूर रखें।

💰 कुल खर्च कितना? नोटरी कार्यालय के पास की दुकानों पर पूरा काम — स्टांप, टाइपिंग और नोटरी सत्यापन मिलाकर — आमतौर पर ₹100 से ₹200 में हो जाता है। नोटरी का निर्धारित शुल्क अलग से छोटा होता है; ज़्यादा रकम मांगी जाए तो रसीद ज़रूर लें।

नमूना — शपथ-पत्र का खाका कैसा दिखता है

हर शपथ-पत्र में ये हिस्से एक ही क्रम में होते हैं। नीचे आम खाका दे रहे हैं — कोष्ठक वाली जगहों पर अपनी जानकारी भरनी होती है:

शपथ-पत्र

(स्टांप पेपर / ई-स्टांप पर — ऊपर स्टांप का ब्योरा)

मैं, (पूरा नाम) पुत्र/पुत्री/पत्नी (पिता या पति का नाम), आयु (उम्र) वर्ष, निवासी (पूरा पता), शपथपूर्वक बयान करता/करती हूं कि:

1. कि ……………… (पहली बात — जैसे: मेरा नाम दस्तावेज़ों में इस तरह दर्ज है)।

2. कि ……………… (दूसरी बात — जैसे: सही नाम/तथ्य ये है)।

3. कि ……………… (तीसरी बात — जैसे: ये शपथ-पत्र इस काम के लिए दिया जा रहा है)।

4. कि ऊपर लिखी सभी बातें मेरी जानकारी और विश्वास में सत्य हैं, कुछ भी छिपाया नहीं गया है।

सत्यापन: आज दिनांक (तारीख) को स्थान (शहर/कस्बा) में सत्यापित किया गया कि इस शपथ-पत्र की विषय-वस्तु मेरी जानकारी में सत्य है।

शपथकर्ता के हस्ताक्षर: ………………
प्रमाणन: नोटरी/शपथ आयुक्त की मुहर, हस्ताक्षर, नाम व पंजीकरण संख्या

ये 7 गलतियां शपथ-पत्र को बेकार कर सकती हैं

कार्यालयों में शपथ-पत्र खारिज होने की सबसे आम वजहें — बनवाते समय इस सूची को साथ रखिए:

✅ उद्देश्य साफ लिखें — शपथ-पत्र में ये ज़रूर हो कि ये किस काम/किस कार्यालय के लिए दिया जा रहा है। बिना उद्देश्य का शपथ-पत्र अधूरा माना जाता है।

✗ पहले से हस्ताक्षर करके मत ले जाएं — हस्ताक्षर नोटरी/शपथ आयुक्त के सामने ही होते हैं, वरना सत्यापन नहीं होगा।

✗ नाम-पते में काट-छांट न करें — शपथ-पत्र पर ओवरराइटिंग या व्हाइटनर लगा हो तो कई कार्यालय उसे स्वीकार नहीं करते। गलती हो तो दोबारा बनवाएं।

✅ पहचान-पत्र साथ ले जाएं — आधार कार्ड या फोटोयुक्त पहचान-पत्र के बिना नोटरी सत्यापन नहीं करता।

✗ दूसरे के नाम पर हस्ताक्षर कभी न करें — किसी और की जगह शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करना धोखाधड़ी है; पहचान बदलकर छल करने पर तीन साल तक के कारावास का प्रावधान है।

✅ सुनी-सुनाई बात का स्रोत लिखें — जो बात आपने खुद नहीं देखी, उसके बारे में लिखें तो “मुझे इस स्रोत से जानकारी मिली” — ये अदालत के नियमों की मांग है।

✗ पुराने शपथ-पत्र को दोबारा इस्तेमाल न करें — तारीख और उद्देश्य पुराना हो तो नया बनवाएं; कुछ कार्यालय 6 महीने से पुराना शपथ-पत्र नहीं लेते।

🚨 झूठा शपथ-पत्र = अपराध: शपथ-पत्र में जानबूझकर झूठी जानकारी देना सिर्फ कागज़ी गलती नहीं — ये अपराध है। भारतीय न्याय संहिता में झूठे साक्ष्य और झूठे बयान के लिए कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। अदालत के सामने झूठा शपथ-पत्र पेश करने पर अदालत संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश भी दे सकती है। इसलिए वही लिखें जो सच हो — और जो सच हो, वही शपथ लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: क्या शपथ-पत्र घर पर खुद लिखकर नोटरी से सत्यापित कराया जा सकता है?

हां — मसौदा आप खुद भी तैयार कर सकते हैं, बस वो सही स्टांप पेपर/ई-स्टांप पर होना चाहिए और उसमें सारे ज़रूरी हिस्से (बयान, क्रमांकित बिंदु, सत्यापन खंड) होने चाहिए। लेकिन हस्ताक्षर और शपथ नोटरी के सामने ही होंगे।

प्रश्न 2: शपथ-पत्र हिंदी में बनेगा या अंग्रेज़ी में?

हिंदी, अंग्रेज़ी या राज्य की भाषा — तीनों में बन सकता है। बस ध्यान रहे कि जिस कार्यालय में देना है, वो उस भाषा को स्वीकार करता हो। उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में शपथ-पत्र आमतौर पर अंग्रेज़ी में ही दिया जाता है।

प्रश्न 3: क्या शपथ-पत्र की कोई समय-सीमा (वैधता अवधि) होती है?

कानून में कोई तय अवधि नहीं है, लेकिन व्यवहार में कई कार्यालय 6 महीने से पुराना शपथ-पत्र स्वीकार नहीं करते — खासकर आय या पते जैसे बदलने वाले तथ्यों पर। काम के समय ताज़ा बनवाना ही सुरक्षित है।

प्रश्न 4: नाम बदलने के लिए सिर्फ शपथ-पत्र काफी है?

नहीं — नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया में तीन चरण होते हैं: शपथ-पत्र, अखबार में विज्ञापन, और राजपत्र (गज़ट) में प्रकाशन। सिर्फ शपथ-पत्र से सरकारी दस्तावेज़ों में नाम नहीं बदलता।

प्रश्न 5: ई-स्टांप कहां से मिलेगा और क्या वो असली स्टांप पेपर जैसा ही मान्य है?

हां, ई-स्टांप पूरी तरह मान्य है। हरियाणा में इसे egrashry.nic.in पोर्टल से ऑनलाइन या अधिकृत स्टांप विक्रेता से लिया जा सकता है। इस पर प्रमाणपत्र संख्या और क्यूआर कोड होता है, जिससे इसकी जांच ऑनलाइन हो सकती है।

प्रश्न 6: क्या नाबालिग के लिए शपथ-पत्र बन सकता है?

नाबालिग खुद शपथ-पत्र नहीं दे सकता — उसकी ओर से माता-पिता या अभिभावक शपथ-पत्र देते हैं (जैसे बच्चे के नाम/जन्मतिथि सुधार के लिए)।

शपथ-पत्र छोटा कागज़ है, पर इसकी शपथ बड़ी होती है। सही स्टांप, सही फॉर्मेट और सही व्यक्ति के सामने सत्यापन — इन तीनों का ध्यान रख लिया, तो ये कागज़ हर दफ्तर में आपका काम आसान कर देगा। और एक आखिरी बात — शपथ-पत्र में वही लिखें जो सच है, क्योंकि शपथ पर कही गई बात से मुकरना आसान नहीं होता।

नोट: ये लेख सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, किसी की निजी स्थिति पर कानूनी सलाह नहीं। किसी बड़े फैसले — जैसे संपत्ति, नाम परिवर्तन या अदालती मामले — से पहले अनुभवी वकील से सलाह ज़रूर लें।

Rohit Suhan
आसान भाषा में कानूनी जानकारी — हर भारतीय के लिए।

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