ज़मीन-जायदाद — कानूनी जानकारी
सीधी बात — अगर आप सोचते हैं कि विसीयत सिरà¥à¤«à¤¼ बड़े घरों और ज़मींदारों के काम की चीज़ है, तो आगे पढ़ने से पहले à¤à¤• मिनट रà¥à¤•िà¤à¥¤ à¤à¤• 400 गज़ का मकान, आधी ज़मीन, या सिरà¥à¤«à¤¼ à¤à¤• बैंक जमा — जिसके पीछे à¤à¥€ वारिस हैं, उसके पीछे à¤à¤—ड़ा à¤à¥€ हो सकता है। और वो à¤à¤—ड़ा विसीयत न होने की वजह से होता है, संपतà¥à¤¤à¤¿ बड़ी होने की वजह से नहीं।
पिछले लेख में हमने ज़मीन के बंटवारे की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ समà¤à¥€ थी — वो तब की बात थी जब वारिसों के बीच हिसाब नहीं बनता। विसीयत उस à¤à¤—ड़े की जड़ पर ही कà¥à¤²à¥à¤¹à¤¾à¤¡à¤¼à¥€ मारती है: मालिक अपने जीते-जी लिखकर रख देता है कि उसके बाद कौन कà¥à¤¯à¤¾ पाà¤à¤—ा। आज जानिठ— विसीयत आखिर होती कà¥à¤¯à¤¾ है, न बनाई तो कà¥à¤¯à¤¾ होगा, वैध विसीयत की 5 कानूनी शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚ कौन-सी हैं, गवाह चà¥à¤¨à¤¤à¥‡ वकà¥à¤¤ कà¥à¤¯à¤¾ सावधानी बरतें, रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ कराà¤à¤‚ या नहीं, और वो 6 गलतियां जो विसीयत को अदालत में कमज़ोर कर देती हैं।
विसीयत है कà¥à¤¯à¤¾ — à¤à¤• वाकà¥à¤¯ की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾
विसीयत यानी मालिक का वो लिखित à¤à¤²à¤¾à¤¨, जिसमें वो बताता है कि उसके न रहने पर उसकी संपतà¥à¤¤à¤¿ किसे और कैसे मिलेगी। ये बात जीवन à¤à¤° मालिक के हाथ में रहती है — जब चाहे बदल सकता है, रदà¥à¤¦ कर सकता है — लेकिन मालिक के न रहने के बाद यही कागज़ सबसे मज़बूत आवाज़ बन जाता है।
समà¤à¤¨à¥‡ के लिठतीन बातें गांठबांध लीजिà¤:
📌 विसीयत कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ कर सकती है
- संपतà¥à¤¤à¤¿ का बंटवारा तय करना — कौन कितना पाà¤à¤—ा, ये मालिक खà¥à¤¦ तय करता है।
- निषà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• (executor) नियà¥à¤•à¥à¤¤ करना — वो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ जो विसीयत के हिसाब से बंटवारा करवाà¤à¤—ा।
- नाबालिग बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤• का नाम लिखना — अगर दोनों माता-पिता न रहें तो बचà¥à¤šà¥‡ किसकी देखरेख में रहेंगे।
- किसी खास वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ या संसà¥à¤¥à¤¾ (जैसे कोई टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ) के लिठहिसà¥à¤¸à¤¾ रखना।
à¤à¤• और बात, जो ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोग नहीं जानते: विसीयत में वो चीज़ नहीं दी जा सकती जो आपकी ही नहीं है। जैसे पà¥à¤¶à¥à¤¤à¥ˆà¤¨à¥€ ज़मीन में आपका हिसà¥à¤¸à¤¾ तो आप दे सकते हैं, लेकिन पूरा का पूरा घर — जिसमें à¤à¤¾à¤ˆ का à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¤¾ है — सिरà¥à¤«à¤¼ अपने हिसà¥à¤¸à¥‡ तक विसीयत में आ सकता है।
विसीयत न बनाई तो कà¥à¤¯à¤¾ होगा — डिफ़ॉलà¥à¤Ÿ कानून बोलता है
ये वो सवाल है जिसका जवाब लोग सबसे कम जानते हैं और जो सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ काम का है। अगर किसी ने विसीयत नहीं बनाई, तो उसकी संपतà¥à¤¤à¤¿ कानून की किताब के हिसाब से बंटती है — मालिक की मरà¥à¤œà¤¼à¥€ इसमें कहीं नहीं आती।
हिंदू परिवारों पर हिंदू उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ार अधिनियम, 1956 लागू होता है। इसके तहत सबसे पहले शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€-1 के वारिस आते हैं — पतà¥à¤¨à¥€, बचà¥à¤šà¥‡ और मां (2005 के संशोधन के बाद बेटियों का हक बेटों जैसा ही है)। अगर शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€-1 में कोई न हो, तà¤à¥€ अगली शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की बारी आती है।
मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® परिवारों के लिठअलग नियम हैं — वहां विसीयत से सिरà¥à¤«à¤¼ à¤à¤•-तिहाई संपतà¥à¤¤à¤¿ तक का बंटवारा किया जा सकता है, बाकी का बंटवारा शरीयत के तय नियमों से होगा, और वारिस को विसीयत से देने पर बाकी वारिसों की सहमति ज़रूरी होती है।
âš ï¸ à¤…à¤¸à¤²à¥€ नतीजा: विसीयत न बनने पर à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ में “मà¥à¤à¥‡ बड़ा हिसà¥à¤¸à¤¾ चाहिऔ, “मैंने मां की सेवा की” जैसे à¤à¤—ड़े अदालतों में सालों चलते हैं — वो पैसा जो वकीलों की फीस में जाता है, विसीयत के खरà¥à¤š से हज़ार गà¥à¤¨à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है। और विसीयत बनवाने का खरà¥à¤š? नीचे पढ़िठ— शूनà¥à¤¯ से लेकर कà¥à¤› सौ रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ तक।
वैध विसीयत की 5 कानूनी शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ार अधिनियम, 1925 विसीयत के नियम तय करता है। इसकी धारा 59 कहती है कि 18 साल से ऊपर का और सही दिमाग वाला हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ विसीयत बना सकता है। और धारा 63 विसीयत के सही होने की शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚ बताती है। पांचों शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚ नीचे à¤à¤•-à¤à¤• करके:
①लिखित में हो
मà¥à¤‚हज़बानी “मैंने फलां को दे दिया” कानून की नज़र में विसीयत नहीं है। à¤à¤¾à¤·à¤¾ कोई à¤à¥€ हो सकती है — हिंदी, अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¤¼à¥€, उरà¥à¤¦à¥‚ — बस बातें साफ़ और बेधड़क होनी चाहिà¤, ताकि मंशा पर शक न हो।
â‘¡ हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° मालिक के
विसीयत पर मालिक के हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° या निशान (अंगूठा à¤à¥€ चलता है) होने चाहिठ— बेहतर है कि हर पनà¥à¤¨à¥‡ पर छोटे हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° और आखिरी पनà¥à¤¨à¥‡ पर पूरे हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° हों, ताकि पनà¥à¤¨à¤¾ बदलने का शक न रहे।
③ दो गवाह
कम से कम दो गवाह चाहिà¤, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मालिक को हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करते देखा हो (या मालिक ने खà¥à¤¦ अपने हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ उनके सामने की हो)। गवाहों को मालिक के सामने ही हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करने हैं।
â‘£ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° इचà¥à¤›à¤¾
धारा 61 साफ कहती है — धोखे, दबाव या ज़ोर-ज़बरदसà¥à¤¤à¥€ से बनवाई गई विसीयत रदà¥à¤¦ मानी जाà¤à¤—ी। मालिक अपनी मरà¥à¤œà¤¼à¥€ से, सही दिमाग की हालत में लिखे, यही सबसे बड़ा नियम है।
⑤ तारीख ज़रूर लिखें
हर विसीयत पर तारीख लिखें — कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आखिरी विसीयत ही मानà¥à¤¯ होती है। तारीख न होगी तो नई और पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ विसीयत में à¤à¤—ड़ा खड़ा हो जाà¤à¤—ा।
विसीयत में कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ लिखें — पूरा खाका
विसीयत का कोई सरकारी तय फॉरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿ नहीं है — सादे कागज़ पर à¤à¥€ लिखी विसीयत वैध है, अगर ऊपर वाली शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚ पूरी हों। लेकिन à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ खाका वो है जिसमें ये सारे हिसà¥à¤¸à¥‡ कà¥à¤°à¤® से हों:
| हिसà¥à¤¸à¤¾ | कà¥à¤¯à¤¾ लिखें |
|---|---|
| पहचान और घोषणा | अपना पूरा नाम, पता, उमà¥à¤° — और ये साफ़ à¤à¤²à¤¾à¤¨ कि “ये मेरी आखिरी विसीयत है, मैं सही दिमाग और अपनी मरà¥à¤œà¤¼à¥€ से बना रहा/रही हूं।” |
| पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ विसीयत रदà¥à¤¦ | “इससे पहले की मेरी सà¤à¥€ विसीयतें रदà¥à¤¦ मानी जाà¤à¤‚।” — ये à¤à¤• पंकà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡-नठà¤à¤—ड़े को खतà¥à¤® कर देती है। |
| संपतà¥à¤¤à¤¿ की सूची | हर संपतà¥à¤¤à¤¿ का बà¥à¤¯à¥‹à¤°à¤¾ — मकान का पता और खसरा नंबर, खाते की जानकारी, बैंक जमा। पहचान हो जाà¤, इतना काफ़ी है। |
| बंटवारे का हिसाब | कौन-सी संपतà¥à¤¤à¤¿ किसको मिलेगी, साफ़ नाम के साथ। जहां चाहें, कारण à¤à¥€ लिख दें — “बेटी को ये हिसà¥à¤¸à¤¾ इसलिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि…” — ये पंकà¥à¤¤à¤¿ अदालत में बहà¥à¤¤ काम आती है। |
| निषà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• और अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤• | बंटवारा करवाने वाले निषà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• का नाम, और नाबालिग बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤• का नाम (अगर ज़रूरी हो)। |
| हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° और गवाह | तारीख, जगह, मालिक के हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤°, फिर दोनों गवाहों के नाम-पते-हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤°à¥¤ गवाहों के नीचे ये पंकà¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ लिखें कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मालिक को हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करते देखा। |
💡 वकील से लिखवाà¤à¤‚ या खà¥à¤¦ लिखें? कानूनन दोनों चलेंगे — लेकिन अगर संपतà¥à¤¤à¤¿ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है, वारिस कई हैं, या किसी को बंटवारे से बाहर रखा जा रहा है, तो वकील से लिखवाना बेहतर है। वकील वो बारीकियां जानता है जो आम आदमी से छूट जाती हैं (जैसे अवशेष खंड — बची-खà¥à¤šà¥€ संपतà¥à¤¤à¤¿ किसे मिलेगी)। छोटी और सीधी विसीयत आप खà¥à¤¦ à¤à¥€ लिख सकते हैं।
गवाह: विसीयत का सबसे गलत समà¤à¤¾ गया हिसà¥à¤¸à¤¾
विसीयत के मामले अदालत में सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गवाहों पर ही अटकते हैं। इसलिठइस हिसà¥à¤¸à¥‡ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से पढ़िठ— यहां 5 नियम हैं:
1. गवाह दो से कम नहीं, ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो तो बेहतर नहीं। दो गवाह कानून की नà¥à¤¯à¥‚नतम शरà¥à¤¤ हैं। तीन-चार गवाह बना लेने से विसीयत मज़बूत नहीं होती — उलà¥à¤Ÿà¤¾ बाद में सबको अदालत बà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¾ मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। दो ही काफी हैं।
2. गवाह को विसीयत की बातें जाननी ज़रूरी नहीं। गवाह सिरà¥à¤«à¤¼ ये गवाही देता है कि “मालिक ने मेरे सामने हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° किठथे।” उसे ये जानने की ज़रूरत नहीं कि अंदर किसे कà¥à¤¯à¤¾ मिला है।
3. हिंदू कानून में रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° गवाह बन सकता है — लेकिन बनाना नहीं चाहिà¤à¥¤ ये सबसे बड़ा à¤à¥à¤°à¤® है। हिंदू कानून में गवाह लाà¤à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ (जिसे संपतà¥à¤¤à¤¿ मिल रही हो) à¤à¥€ हो सकता है, लेकिन पारसी और ईसाई कानून में नहीं। और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• सलाह ये है: जिसे विसीयत से कà¥à¤› मिल रहा हो, उसे गवाह कà¤à¥€ न बनाà¤à¤‚ — वरना बाकी वारिस अदालत में कहेंगे कि “गवाह ने दबाव डलवाया था।” गवाह à¤à¤¸à¤¾ चà¥à¤¨à¥‡à¤‚ जो निषà¥à¤ªà¤•à¥à¤· हो — पड़ोसी, दोसà¥à¤¤, पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ जानकार।
4. गवाह 18 साल से ऊपर और सही दिमाग का हो। बचà¥à¤šà¥‡ या मानसिक रूप से असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ गवाह नहीं बन सकता।
5. गवाह के हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° मालिक के सामने होने चाहिà¤à¥¤ मालिक ने हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° किà¤, गवाहों ने देखा, फिर गवाहों ने मालिक की मौजूदगी में हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° किठ— यही कà¥à¤°à¤® धारा 63 मांगती है। बाद में घर जाकर हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करवा लेने से नियम टूटता है।
रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨: कराà¤à¤‚ या न कराà¤à¤‚ — फैसला आपकी समठसे
ये विसीयत का दूसरा सबसे बड़ा सवाल है। जवाब सीधा है: रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ ज़रूरी नहीं है — पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 18 के तहत विसीयत का रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¤šà¥à¤›à¤¿à¤• है। बिना रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की विसीयत à¤à¥€ पूरी तरह वैध है, और सिरà¥à¤«à¤¼ रजिसà¥à¤Ÿà¤° न होने से विसीयत पर शक नहीं किया जा सकता। फिर à¤à¥€ लोग कराते कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ हैं? तà¥à¤²à¤¨à¤¾ देखिà¤:
| मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ | रजिसà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¡ विसीयत | बिना रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की विसीयत |
|---|---|---|
| वैधता | पूरी वैध | पूरी वैध (धारा 63 पूरी हो तो) |
| सबूत की मज़बूती | रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤° के सामने पहचान तय हà¥à¤ˆ — असलियत पर शक करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल | गवाहों की गवाही पर निरà¥à¤à¤° — गवाह न रहे तो दिकà¥à¤•त |
| सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ | मूल पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤° की हिफ़ाज़त में — फटना, जलना, चोरी होना नामà¥à¤®à¤•िन | खà¥à¤¦ संà¤à¤¾à¤²à¤•र रखनी होगी — लॉकर या वकील के पास |
| खरà¥à¤š | नाममातà¥à¤° शà¥à¤²à¥à¤• (राजà¥à¤¯ के हिसाब से कà¥à¤› सौ रà¥à¤ªà¤¯à¥‡) | शूनà¥à¤¯ |
| नोटरी की मà¥à¤¹à¤° | नोटरी से कोई लेना-देना नहीं — रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ ही काफी है | नोटरी की मà¥à¤¹à¤° लगवाना ज़रूरी नहीं — कानून नोटरी नहीं मांगता |
सीधी सलाह: अगर वारिसों में à¤à¤—ड़े की आशंका है, या संपतà¥à¤¤à¤¿ बड़ी है, तो रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ करवा लीजिठ— खरà¥à¤š नाममातà¥à¤° है और फायदे बड़े हैं। रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के लिठउप-पंजीयक (सब-रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤°) के कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ जाना होता है, पहचान-पतà¥à¤° और दो गवाह साथ लेकर।
✅ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚प शà¥à¤²à¥à¤• — शूनà¥à¤¯: विसीयत पर कोई सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚प शà¥à¤²à¥à¤• नहीं लगता। सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚प पेपर पर लिखना ज़रूरी नहीं है — सादा कागज़ ही काफी है। जो वकील या à¤à¤œà¥‡à¤‚ट “सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚प पेपर लगेगा” कहकर पैसा मांगे, समठजाइठकि वो गलत जानकारी दे रहा है।
6 गलतियां जो विसीयत को कमज़ोर कर देती हैं
अदालतों में विसीयतों को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ बातों पर मिलती है। अपनी विसीयत बनाते वकà¥à¤¤ इस सूची को आखिरी जांच की तरह इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कीजिà¤:
✗ असà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ à¤à¤¾à¤·à¤¾ — “बेटे को घर दे दिया” — कौन-सा घर? कौन-सा बेटा? हर संपतà¥à¤¤à¤¿ की साफ़ पहचान लिखें।
✗ काट-छांट बिना हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° — जहां à¤à¥€ सà¥à¤§à¤¾à¤° किया है, उसके बगल में छोटे हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° ज़रूर करें, वरना बाद में कहा जाà¤à¤—ा कि “ये पंकà¥à¤¤à¤¿ बाद में जोड़ी गई।”
✗ लाà¤à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ को गवाह बनाना — हिंदू कानून में चल जाà¤à¤—ा, लेकिन à¤à¤—ड़ा होगा तो यही सबसे पहला हमला होगा। निषà¥à¤ªà¤•à¥à¤· गवाह चà¥à¤¨à¥‡à¤‚।
✗ तारीख न लिखना — बिना तारीख की विसीयत पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€-नई के à¤à¤—ड़े में फंस जाती है।
✗ किसी वारिस को बिना कारण बाहर रखना — कानूनी हक है, मालिक किसी को à¤à¥€ बाहर रख सकता है — लेकिन कारण लिखने से अदालत में विसीयत मज़बूत होती है।
✗ विसीयत को à¤à¤¸à¥€ जगह रखना जहां कोई न ढूंढे — अलमारी के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ डिबà¥à¤¬à¥‡ में रखी विसीयत काम की नहीं। निषà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• या à¤à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤®à¤‚द वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को जगह बता कर रखें, या रजिसà¥à¤Ÿà¤° करवा लें।
विसीयत बदलनी या रदà¥à¤¦ करनी हो तो
विसीयत जीवन à¤à¤° बदली जा सकती है — यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। तीन तरीके हैं:
- नई विसीयत बनाकर — नई विसीयत में “पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ सà¤à¥€ विसीयतें रदà¥à¤¦” लिख दीजिà¤, पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ अपने आप खतà¥à¤®à¥¤
- कोडिसिल (परिशिषà¥à¤Ÿ) बनाकर — छोटा बदलाव हो तो पूरी विसीयत दोबारा लिखने की ज़रूरत नहीं; à¤à¤• परिशिषà¥à¤Ÿ लिखकर उसी तरह दो गवाहों से हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करवा लीजिà¤à¥¤
- नषà¥à¤Ÿ करके — विसीयत को फाड़कर, जलाकर या नषà¥à¤Ÿ करके à¤à¥€ रदà¥à¤¦ किया जा सकता है — लेकिन ये तरीका à¤à¤—ड़े को बà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¾ देता है, इसलिठलिखित रदà¥à¤¦à¥€à¤•रण बेहतर है।
अकà¥à¤¸à¤° पूछे जाने वाले सवाल
ⓠकà¥à¤¯à¤¾ विसीयत हाथ से लिखी होनी चाहिठया टाइप à¤à¥€ चलेगी?
दोनों चलेंगी। हाथ से लिखी, टाइप की हà¥à¤ˆ — फॉरà¥à¤® से कोई फरà¥à¤• नहीं पड़ता। फरà¥à¤• सिरà¥à¤«à¤¼ शरà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से पड़ता है: लिखित, हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤°, दो गवाह, सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° इचà¥à¤›à¤¾à¥¤
ⓠकà¥à¤¯à¤¾ विसीयत बनाने के लिठवकील ज़रूरी है?
कानूनन नहीं। लेकिन संपतà¥à¤¤à¤¿ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो, वारिस कई हों या किसी को बाहर रखा जा रहा हो — तो वकील से लिखवाना समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ है।
ⓠविसीयत के बाद मालिक संपतà¥à¤¤à¤¿ बेच सकता है?
बिलà¥à¤•à¥à¤²à¥¤ विसीयत मालिक के जीते-जी संपतà¥à¤¤à¤¿ पर कोई रोक नहीं लगाती। मालिक जब चाहे बेचे, गिरवी रखे या दान करे — विसीयत सिरà¥à¤«à¤¼ उसके न रहने के बाद लागू होती है।
ⓠकà¥à¤¯à¤¾ विसीयत को अदालत से पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ (पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥‡à¤Ÿ) करवाना ज़रूरी है?
आम तौर पर नहीं — लेकिन अगर विसीयत कोलकाता, चेनà¥à¤¨à¤ˆ या मà¥à¤‚बई जैसे पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚सी शहरों में बनी हो, या अचल संपतà¥à¤¤à¤¿ वहां सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हो, तो पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥‡à¤Ÿ (अदालत से विसीयत की पà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤•ता का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£-पतà¥à¤°) ज़रूरी हो जाता है। हरियाणा जैसे राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में आम विसीयतों के लिठये बाधà¥à¤¯à¤¤à¤¾ नहीं है।
ⓠपति-पतà¥à¤¨à¥€ à¤à¤• ही विसीयत बना सकते हैं?
बना तो सकते हैं (संयà¥à¤•à¥à¤¤ विसीयत), लेकिन सलाह यही है कि अलग-अलग बनाà¤à¤‚ — कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दोनों की संपतà¥à¤¤à¤¿, वारिस और मंशा अलग-अलग होती है, और à¤à¤• के न रहने पर दूसरी की विसीयत में उलà¤à¤¨ पैदा हो सकती है।
ⓠविसीयत खो जाठतो कà¥à¤¯à¤¾ होगा?
अगर रजिसà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¡ है तो उप-पंजीयक कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिल जाà¤à¤—ी। बिना रजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की विसीयत खो जाठऔर कोई पà¥à¤°à¤¤à¤¿ न हो, तो साबित करना बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है — इसलिठहमेशा दो-तीन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ अलग-अलग सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ जगहों पर रखें।
📠धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें: ये लेख सामानà¥à¤¯ कानूनी जानकारी के लिठहै, किसी की वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर कानूनी सलाह नहीं। विसीयत जैसा अहम कागज़ बनाते वकà¥à¤¤ — खासकर जब संपतà¥à¤¤à¤¿ बड़ी हो, वारिस कई हों, या किसी वारिस को बाहर रखा जा रहा हो — अनà¥à¤à¤µà¥€ वकील से सलाह ज़रूर लें, ताकि बाद में कोई बड़ा फैसला पछतावे में न बदले।